
मेष राशि गणेश चतुर्थी उपाय 2026: मंगल दोष शांति और विजय के वैदिक सनातनी उपाय
मेष राशि के जातकों के लिए गणेश चतुर्थी 2026 पर वैदिक सनातनी उपाय — मंगल दोष शांति, क्रोध नियंत्रण, कोर्ट-कचहरी में विजय और करियर उन्नति के लिए विशेष सिंदूर-मोदक उपाय, सही पंचांग व मुहूर्त सहित।
Mesh Rashi (Aries) Ganesh Chaturthi 2026: Vedic Remedies for Mars Dosha, Anger Control, Career & Court Case Victory
सनातन परंपरा में बारह राशियों में से मेष राशि को प्रथम स्थान प्राप्त है, और इसका स्वामी ग्रह मंगल है। मंगल अग्नि तत्व, साहस, ऊर्जा, नेतृत्व और आक्रामकता का प्रतीक माना जाता है। जिस प्रकार अग्नि नियंत्रित रहने पर प्रकाश और ऊष्मा देती है परंतु अनियंत्रित होने पर सब कुछ भस्म कर देती है, उसी प्रकार मंगल ग्रह भी संतुलित होने पर साहस, नेतृत्व और सफलता देता है, परंतु अशुभ स्थिति में क्रोध, दुर्घटना, रक्त संबंधी विकार, भाई-बहनों से विवाद और कानूनी झगड़ों का कारण बन जाता है।
गणेश जी को शास्त्रों में "विघ्नहर्ता", "बुद्धिदाता" और "प्रथम पूज्य" कहा गया है। उनकी उपासना से न केवल विघ्न दूर होते हैं बल्कि बुद्धि और विवेक का संचार भी होता है, जो मंगल के आवेग को संतुलित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। गणपति का सिंदूर श्रृंगार स्वयं मंगल-तत्व से गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है, इसलिए ज्योतिष और तंत्र दोनों परंपराओं में गणेश पूजा को मंगल दोष शांति के सबसे प्रभावी उपायों में गिना जाता है। गणेश चतुर्थी 2026, जो 14 सितंबर सोमवार को पड़ रही है, मेष राशि के जातकों के लिए मंगल ग्रह को साधने और जीवन में स्थिरता, संयम व विजय प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर है। इस लेख में हम मेष राशि के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए वैदिक सनातनी उपाय, सटीक पंचांग जानकारी, और कानूनी मामलों में विजय हेतु विशेष उपाय विस्तार से जानेंगे।
गणेश चतुर्थी 2026 का सम्पूर्ण पंचांग (14 सितंबर, सोमवार)
किसी भी उपाय को करने से पहले सही तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि शास्त्रों में कहा गया है कि बिना उचित मुहूर्त के किया गया कर्म पूर्ण फल नहीं देता। मेष राशि के जातकों के लिए 14 सितंबर 2026 का पंचांग इस प्रकार है:
- वार: सोमवार — चंद्रमा का दिन, जो मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन के लिए विशेष उपयुक्त माना जाता है।
- तिथि: शुक्ल पक्ष चतुर्थी, प्रारंभ सुबह 07:06 बजे से (इससे पूर्व तृतीया तिथि रहेगी)
- नक्षत्र: चित्रा नक्षत्र, दोपहर 01:55 बजे तक, तत्पश्चात स्वाति नक्षत्र प्रारंभ होगा
- योग: ब्रह्म योग, दोपहर 12:45 बजे तक, फिर इंद्र योग
- करण: गर करण सुबह 07:06 तक, तत्पश्चात वणिज करण
- पक्ष: शुक्ल पक्ष, भाद्रपद मास (अमांत गणना अनुसार)
- मध्याह्न पूजा मुहूर्त (दिल्ली संदर्भ): सुबह 11:02 से दोपहर 01:30/01:31 बजे तक — यह गणपति स्थापना का सर्वाधिक शुभ काल है, क्योंकि पौराणिक मान्यता के अनुसार गणेश जी का जन्म मध्याह्न काल में ही हुआ था।
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 01:00 बजे तक
- राहु काल (वर्जित समय): सुबह 07:59 से 09:31 बजे तक — इस अवधि में स्थापना या नई शुरुआत न करें
- गुलिक काल: दोपहर 02:08 से 03:40 बजे तक
- यमगण्ड काल: सुबह 11:03 से 12:35 बजे तक
- सूर्योदय: सुबह 06:26 बजे; सूर्यास्त: शाम 06:44 बजे
- चंद्र राशि: कन्या राशि (रात्रि 01:26 बजे तक), तत्पश्चात तुला राशि
- शुभ रंग: सफेद
- विक्रम संवत: 2083; शक संवत: 1948
- विसर्जन (अनंत चतुर्दशी): 25 सितंबर 2026, शुक्रवार
मेष राशि के जातकों के लिए ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि पूजा मध्याह्न मुहूर्त 11:02 से 01:00 बजे के बीच ही करें, क्योंकि यह अभिजित मुहूर्त और मध्याह्न मुहूर्त दोनों के संयोग का समय है। राहु काल (07:59-09:31) और यमगण्ड काल (11:03-12:35 का प्रारंभिक भाग) में स्थापना से पूर्णतः बचें।
मेष राशि और मंगल-गणेश तत्व का गहन संबंध
ज्योतिष शास्त्र में मंगल को "सेनापति" और "भूमि पुत्र" कहा गया है। मंगल अग्नि तत्व का कारक ग्रह है और इसका रंग लाल है। मेष राशि पर मंगल का सीधा स्वामित्व होने के कारण इस राशि के जातकों में स्वाभाविक रूप से नेतृत्व क्षमता, साहस, स्वतंत्र निर्णय लेने की प्रवृत्ति और शीघ्रता से कार्य करने का गुण पाया जाता है। यही गुण जब संतुलित रहते हैं तो व्यक्ति को सेनापति, प्रशासक, उद्यमी या खिलाड़ी के रूप में सफलता दिलाते हैं। परंतु जब मंगल कुंडली में पीड़ित, नीच राशि में, या शत्रु ग्रहों के साथ हो, तो यही ऊर्जा क्रोध, हठ, दुर्घटना-भय, रक्तचाप, भाई-बहनों से कलह और विवादों का कारण बन जाती है।
गणेश जी, जिन्हें "गणों के अधिपति" और सभी देवताओं में प्रथम पूज्य माना गया है, स्वयं बुद्धि, विवेक और विनम्रता के प्रतीक हैं। शिव पुराण और स्कंद पुराण दोनों में यह उल्लेख मिलता है कि गणेश जी की बुद्धि ने उन्हें प्रथम पूज्य का पद दिलाया, न कि बल या वेग ने। इसीलिए जब मेष राशि का उग्र मंगल गणेश जी की शांत, विवेकपूर्ण ऊर्जा के संपर्क में आता है, तो एक विशेष संतुलन उत्पन्न होता है — साहस बना रहता है परंतु आवेग नियंत्रित हो जाता है। यही कारण है कि तांत्रिक और ज्योतिषीय दोनों परंपराओं में मेष राशि के लिए गणेश पूजा को मंगल दोष निवारण का एक अत्यंत प्रभावी उपाय माना गया है।
इसके अतिरिक्त, गणेश जी का वाहन मूषक (चूहा) प्रतीकात्मक रूप से इच्छाओं और चंचलता पर नियंत्रण को दर्शाता है, जो मेष राशि की अधीरता को संयमित करने में सहायक सिद्ध होता है। गणेश जी का बड़ा उदर संतोष और सहनशीलता का प्रतीक है — दो ऐसे गुण जिनकी मेष राशि के जातकों में सामान्यतः कमी देखी जाती है।
मेष राशि के लिए विशेष गणेश चतुर्थी उपाय (अन्य राशियों से भिन्न)
नीचे दिए गए उपाय पूर्णतः मेष राशि और मंगल ग्रह की विशिष्ट समस्याओं को ध्यान में रखकर सुझाए गए हैं, ताकि ये अन्य राशियों के उपायों से पूर्णतः भिन्न रहें और मेष राशि के जातकों के लिए विशिष्ट फल प्रदान करें:
- लाल सिंदूर से गणेश तिलक: गणेश चतुर्थी के दिन गणपति की मूर्ति पर शुद्ध लाल सिंदूर का चोला चढ़ाएं। सिंदूर मंगल ग्रह का प्रत्यक्ष कारक द्रव्य माना जाता है, इसलिए यह विशेष रूप से मेष राशि के लिए अत्यंत फलदायी है।
- लाल वस्त्र और लाल आसन अर्पण: पूजा के समय गणपति को लाल रंग का वस्त्र, लाल आसन या लाल चुनरी अर्पित करें, क्योंकि लाल रंग सीधे मंगल ग्रह से संबंधित है और इसे धारण/अर्पित करने से मंगल की ऊर्जा संतुलित होती है।
- मूंगा रत्न युक्त जल से अभिषेक: यदि संभव हो तो अभिषेक के जल में एक छोटा शुद्ध मूंगा रत्न डालकर अभिषेक करें। इससे मंगल ग्रह की ऊर्जा गणपति की कृपा से शुद्ध और संतुलित होती है।
- 21 लाल गुड़हल (जास्वंद) के फूल अर्पित करें: मेष राशि के लिए सामान्य दूर्वा के साथ-साथ 21 लाल गुड़हल के फूल चढ़ाना विशेष रूप से लाभकारी माना गया है, क्योंकि यह पुष्प भी मंगल ग्रह से संबंधित है।
- गुड़ और चने की दाल का विशेष भोग: सामान्य मोदक-लड्डू के अतिरिक्त गुड़-चने की दाल का भोग भी अवश्य अर्पित करें, यह पारंपरिक रूप से मंगल ग्रह की शांति के लिए प्रयुक्त द्रव्य है।
- तांबे के पात्र का प्रयोग: पूजा में तांबे के लोटे, थाली या कलश का प्रयोग करें, क्योंकि तांबा मंगल ग्रह की धातु मानी जाती है।
- मंगलवार-तुल्य संकल्प: गणेश चतुर्थी सोमवार को पड़ने के बावजूद, इस दिन मंगल शांति का विशेष संकल्प लेकर व्रत रखने से मेष राशि के जातकों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।
- गणेश-हनुमान संयुक्त स्तवन: गणेश पूजा के पश्चात हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करना मेष राशि के लिए विशेष प्रभावशाली संयोजन माना जाता है, क्योंकि हनुमान जी भी मंगल दोष निवारण के देवता माने जाते हैं।
- लाल चंदन का प्रयोग: नियमित चंदन के स्थान पर लाल चंदन का तिलक गणपति को अर्पित करें।
मेष राशि के लिए कोर्ट-कचहरी (कानूनी मामलों) में विजय हेतु विशेष उपाय
ज्योतिष के अनुसार मंगल ग्रह का सीधा संबंध विवाद, झगड़ों, प्रतिस्पर्धा और कानूनी मामलों से होता है। जब मंगल कुंडली में छठे, सप्तम या अष्टम भाव में पीड़ित अवस्था में हो, तो मेष राशि के जातक बार-बार कोर्ट-कचहरी, पुलिस केस या पारिवारिक संपत्ति विवाद जैसी स्थितियों में उलझते देखे जाते हैं। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर निम्नलिखित उपाय विशेष रूप से कानूनी विजय के लिए बताए गए हैं:
- गणेश चतुर्थी के दिन प्रातः स्नान के पश्चात गणपति अथर्वशीर्ष का पूर्ण पाठ करें — यह वेदोक्त स्तोत्र कानूनी बाधाओं और शत्रु-बाधाओं को दूर करने में अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
- गणपति की मूर्ति के समक्ष "ॐ गं गणपतये नमः" बीज मंत्र की 21 माला जप करें, विशेष रूप से अभिजित मुहूर्त (12:11-01:00 बजे) के दौरान।
- कोर्ट में पेश होने वाले दिन घर से निकलने से पूर्व गणपति को लाल सिंदूर का तिलक लगाकर आशीर्वाद प्राप्त करें, तथा स्वयं भी माथे पर सिंदूर का टीका लगाकर निकलें।
- एक छोटी सुपारी को लाल कपड़े में बांधकर गणपति के चरणों में रखें और चतुर्थी के दिन से ही इसे अपने कोर्ट-संबंधी दस्तावेज़ों के बैग या पर्स में रखना आरंभ करें, यह पारंपरिक टोटका न्याय में विलंब को समाप्त करता है।
- विसर्जन (25 सितंबर 2026) तक प्रतिदिन संध्या समय "श्री गणपति स्तोत्र" का पाठ करें, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में आ रही बाधाएं क्रमशः समाप्त होती हैं।
- गणेश जी को 5 या 21 दूर्वा की एक विशेष गांठ बांधकर अर्पित करें — यह संख्या शास्त्रों में विशेष रूप से विवाद समाधान और शत्रु-शांति से जोड़ी गई है।
- गणेश चतुर्थी की रात्रि, कोर्ट केस से जुड़े दस्तावेज़ों (प्रतिलिपि रूप में) को कुछ समय के लिए गणपति की मूर्ति के समीप, सम्मानपूर्वक रखें और मानसिक रूप से सत्य व न्याय की प्रार्थना करें, तत्पश्चात दस्तावेज़ों को वापस सुरक्षित स्थान पर रख दें।
- प्रत्येक बुधवार (गणेश जी का दिन) कोर्ट-कचहरी से संबंधित कार्य करने से पूर्व गणपति का स्मरण अवश्य करें।
मेष राशि के करियर और व्यवसाय के लिए उपाय
मेष राशि के जातक स्वाभाविक रूप से नेतृत्वकारी, उद्यमशील और जोखिम लेने में सक्षम होते हैं, परंतु जल्दबाज़ी, अधीरता और निर्णय में स्थिरता की कमी के कारण करियर में बार-बार बाधाएं उत्पन्न होती हैं। गणेश चतुर्थी 2026 पर निम्नलिखित उपाय करियर व व्यवसाय में उन्नति हेतु सहायक सिद्ध होते हैं:
- कार्यस्थल या व्यवसाय स्थल की दक्षिण दिशा में गणपति की एक छोटी मूर्ति स्थापित करें, क्योंकि दक्षिण दिशा मंगल ग्रह से संबंधित मानी जाती है।
- नई परियोजना, नया व्यापार अथवा नए अनुबंध पर हस्ताक्षर करने का संकल्प गणेश चतुर्थी के मध्याह्न मुहूर्त (11:02-01:30) में ही लें।
- गणपति को पीले या लाल रंग के 11 मोदक अर्पित करें और उनमें से एक प्रसाद के रूप में स्वयं ग्रहण करें, शेष परिवारजनों तथा सहयोगियों में बांटें।
- कार्यालय की मेज़ पर लाल कपड़े में लिपटा हुआ एक छोटा गणेश यंत्र या गणपति चित्र स्थापित करें।
- व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होने पर गणपति के समक्ष "ऋद्धि-सिद्धि" के नाम का जप करें, जो व्यापार में स्थिरता और समृद्धि लाने के लिए विशेष माना जाता है।
मेष राशि के स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए उपाय
मंगल ग्रह के असंतुलन से मेष राशि के जातकों को सिरदर्द, उच्च रक्तचाप, चोट-दुर्घटना, त्वचा विकार और अनिद्रा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। गणेश चतुर्थी के अवसर पर स्वास्थ्य संबंधी निम्न उपाय सुझाए जाते हैं:
- गणपति को चांदी की छोटी थाली में शहद और घी मिलाकर विशेष भोग अर्पित करें, यह संयोजन मंगल की उष्णता को शांत करता है।
- गणेश चतुर्थी की रात्रि सोने से पूर्व "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का 108 बार मानसिक जप करें, इससे क्रोध, तनाव और अनिद्रा में उल्लेखनीय शांति मिलती है।
- यदि रक्तचाप संबंधी समस्या हो तो पूजन सामग्री में अत्यधिक लाल पुष्पों की अधिकता से बचें और संतुलित मात्रा में ही प्रयोग करें; गणेश पूजा में तुलसी दल सर्वथा वर्जित है, इसके स्थान पर केवल दूर्वा का ही प्रयोग करें।
- नियमित रूप से प्रातःकाल सूर्य को जल अर्पित करने के साथ गणपति स्मरण करने से मंगल-सूर्य दोनों की ऊर्जा संतुलित रहती है।
मेष राशि के लिए दान और शुभ कार्य
सनातन परंपरा में दान को ग्रह दोष निवारण का एक अनिवार्य अंग माना गया है। गणेश चतुर्थी पर मेष राशि के जातकों को निम्नलिखित दान विशेष रूप से करने चाहिए:
- गुड़ और लाल मसूर की दाल का दान करें, यह द्रव्य सीधे मंगल ग्रह से जुड़ा है।
- लाल वस्त्र, लाल कंबल अथवा तांबे के बर्तन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें।
- गणेश चतुर्थी के बाद आने वाले प्रथम मंगलवार को हनुमान मंदिर में सिंदूर व चोला अर्पित करने का संकल्प लें।
- सैनिकों, पुलिसकर्मियों या अग्निशमन कर्मियों की सहायता हेतु किसी संस्था को यथाशक्ति दान करना भी मंगल ग्रह की शांति के लिए विशेष फलदायी माना गया है, क्योंकि ये सभी वर्ग मंगल ग्रह से संबंधित माने जाते हैं।
मेष राशि के लिए भाई-बहन व पारिवारिक संबंधों में सामंजस्य हेतु उपाय
मंगल ग्रह का ज्योतिष में सीधा संबंध भाई-बहनों और तीसरे भाव से होता है। जब मंगल पीड़ित हो, तो मेष राशि के जातकों को अक्सर भाई-बहनों से संपत्ति विवाद, वैचारिक मतभेद या दूरियों का सामना करना पड़ता है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर परिवार में सामंजस्य लाने हेतु निम्नलिखित उपाय विशेष रूप से सुझाए जाते हैं:
- गणेश चतुर्थी के दिन परिवार के सभी सदस्यों को साथ बिठाकर सामूहिक रूप से आरती करें, इससे पारिवारिक ऊर्जा में सामंजस्य उत्पन्न होता है।
- भाई-बहनों के साथ मिलकर गणपति को मोदक का भोग अर्पित करें और प्रसाद स्वरूप सभी में बांटें, इससे आपसी मनमुटाव कम होता है।
- यदि किसी भाई-बहन से लंबे समय से वार्तालाप बंद हो, तो गणेश चतुर्थी के दिन गणपति के समक्ष संकल्प लेकर संवाद पुनः आरंभ करने का प्रयास करें।
- घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में एक दीपक निरंतर जलाकर रखें, यह पारिवारिक कलह शांत करने में सहायक माना जाता है।
मेष राशि के लिए पूजा सामग्री की संपूर्ण सूची
गणेश चतुर्थी पर मेष राशि के जातकों को निम्नलिखित सामग्री विशेष रूप से एकत्रित करनी चाहिए, ताकि पूजा पूर्ण विधि-विधान से संपन्न हो सके:
- गणपति की मूर्ति (मिट्टी की पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति सर्वोत्तम)
- शुद्ध लाल सिंदूर और लाल चंदन
- 21 दूर्वा की गांठ और 21 लाल गुड़हल के पुष्प
- गुड़, चने की दाल, मोदक व लड्डू
- तांबे का कलश, लोटा व थाली
- लाल वस्त्र, लाल आसन अथवा लाल चुनरी
- शुद्ध घी का दीपक, धूप व अगरबत्ती
- शहद, घी और एक छोटा शुद्ध मूंगा रत्न (अभिषेक हेतु, ऐच्छिक)
- सुपारी, पान के पत्ते और लाल धागा (कोर्ट-कचहरी उपाय हेतु)
- गणपति अथर्वशीर्ष की पुस्तिका अथवा मुद्रित मंत्र
मेष राशि के लिए विशेष सावधानियां
- पूजा के दौरान तुलसी दल का प्रयोग सर्वथा वर्जित है, इस नियम का पालन अवश्य करें।
- राहु काल (07:59-09:31) और अशुभ चौघड़िया में मूर्ति स्थापना न करें।
- क्रोध की स्थिति में पूजा प्रारंभ न करें, पहले मन को शांत करें, तत्पश्चात ही पूजन आरंभ करें।
- मूर्ति विसर्जन पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से ही करें, ताकि जल स्रोत प्रदूषित न हों।
- उपाय करते समय श्रद्धा और नियमितता बनाए रखें, अधूरे मन से किया गया उपाय पूर्ण फल नहीं देता।
गणेश चतुर्थी पूजा विधि (मेष राशि के अनुसार संक्षिप्त क्रम)
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ लाल वस्त्र धारण करें।
- गणपति की मूर्ति को घर या कार्यस्थल की दक्षिण अथवा पूर्व दिशा में स्थापित करें।
- मध्याह्न मुहूर्त (11:02-01:30) में विधिवत पूजा प्रारंभ करें, राहु काल (07:59-09:31) से बचते हुए।
- सिंदूर, लाल गुड़हल, 21 दूर्वा की गांठ, गुड़-चने की दाल और मोदक अर्पित करें।
- गणपति अथर्वशीर्ष तथा "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का 21 माला जप करें।
- आरती करके विशेष रूप से कोर्ट-कचहरी व करियर संबंधी प्रार्थना करें।
- विसर्जन (25 सितंबर 2026) तक प्रतिदिन संध्या समय दीप जलाकर उपरोक्त मंत्र जप जारी रखें।
- विसर्जन के दिन गणपति को अंतिम बार सिंदूर-चोला अर्पित कर विधिपूर्वक विसर्जन करें और अगले वर्ष पुनः शुभागमन की प्रार्थना करें।
निष्कर्ष
मेष राशि के जातकों के लिए गणेश चतुर्थी 2026 केवल एक पारंपरिक पर्व मात्र नहीं है, बल्कि यह मंगल ग्रह की उग्र और आवेगी ऊर्जा को गणेश जी की शांत, विवेकपूर्ण कृपा से संतुलित करने का एक दुर्लभ व शक्तिशाली अवसर है। सही पंचांग, सही मुहूर्त, तथा ऊपर वर्णित विशेष उपायों — सिंदूर चोला, लाल गुड़हल, मूंगा-युक्त अभिषेक, अथर्वशीर्ष पाठ और कोर्ट-कचहरी हेतु विशिष्ट टोटकों — को श्रद्धा व नियमितता के साथ अपनाकर मेष राशि के जातक क्रोध पर नियंत्रण, कानूनी विवादों में विजय, करियर में स्थिरता और मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। स्मरण रहे कि किसी भी उपाय का वास्तविक फल श्रद्धा, नियमितता और धैर्य से ही प्राप्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: मेष राशि के लिए गणेश चतुर्थी पर सबसे प्रभावी उपाय कौन सा है? उत्तर: मेष राशि के लिए सिंदूर चोला और 21 लाल गुड़हल के फूल अर्पित करना सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है, क्योंकि यह मंगल ग्रह की ऊर्जा को सीधे संतुलित करता है और क्रोध-आवेग को शांत करने में विशेष सहायक है। इसके साथ तांबे के पात्र का प्रयोग भी अतिरिक्त लाभ देता है।
प्रश्न 2: कोर्ट केस में जीत के लिए मेष राशि को क्या करना चाहिए? उत्तर: गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ, "ॐ गं गणपतये नमः" की 21 माला जप और सुपारी को लाल कपड़े में बांधकर साथ रखना कानूनी मामलों में विजय दिलाने वाला परंपरागत उपाय माना जाता है। यह उपाय गणेश चतुर्थी से आरंभ कर विसर्जन तक निरंतर जारी रखना चाहिए।
प्रश्न 3: गणेश चतुर्थी 2026 की स्थापना का सही मुहूर्त क्या है? उत्तर: 14 सितंबर 2026 को दिल्ली के संदर्भ अनुसार मध्याह्न पूजा मुहूर्त सुबह 11:02 से दोपहर 01:30 बजे तक है। इस दौरान अभिजित मुहूर्त (12:11-01:00) विशेष शुभ है, जबकि राहु काल (07:59-09:31) में स्थापना नहीं करनी चाहिए।
प्रश्न 4: क्या मेष राशि गणेश पूजा में तुलसी का प्रयोग कर सकती है? उत्तर: नहीं, शास्त्रों के अनुसार गणेश पूजा में तुलसी दल पूर्णतः वर्जित मानी गई है, चाहे राशि कोई भी हो। इसके स्थान पर दूर्वा घास का प्रयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए, विशेष रूप से 21 की संख्या में।
प्रश्न 5: गणेश चतुर्थी के बाद मेष राशि को कौन सा उपाय जारी रखना चाहिए? उत्तर: विसर्जन (25 सितंबर 2026) तक प्रतिदिन संध्या समय दीप जलाकर मंत्र जप जारी रखना चाहिए। इसके पश्चात आने वाले प्रथम मंगलवार को हनुमान मंदिर में सिंदूर-चोला अर्पित करने का संकल्प लेना विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।
अस्वीकरण: यह लेख ज्योतिषीय व सनातनी मान्यताओं पर आधारित सामान्य जानकारी है। व्यक्तिगत कुंडली विश्लेषण हेतु योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।
लेखक: Admin
श्रेणी: उपाय
प्रकाशन तिथि: 10 सितंबर 2026
स्थिति: प्रकाशित
