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सम्पूर्ण कीलक स्तोत्र (संस्कृत)

सम्पूर्ण कीलक स्तोत्र (संस्कृत)

सम्पूर्ण कीलक स्तोत्र संस्कृत में पढ़ें — यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती की छिपी बाधाओं को दूर कर मंत्र-शक्ति को जाग्रत करता है। पूरा पाठ विधि सहित यहाँ उपलब्ध है।

सम्पूर्ण कीलक स्तोत्र (संस्कृत)

ॐ अस्य श्रीकीलकमन्त्रस्य शिव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहासरस्वती देवता, श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः।


ॐ नमश्चण्डिकायै॥ मार्कण्डेय उवाच॥


ॐ विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे। श्रेयःप्राप्तिनिमित्ताय नमः सोमार्धधारिणे॥१॥


सर्वमेतद्विजानीयात् प्रकृत्या रक्ततामिदम्। कवचं देव्युपासितं कीलकं नाम विश्रुतम्॥२॥


ऋषिणा नारदेनोक्तं पूर्वं साधकसिद्धये। साधकानां हितार्थाय पाठ नियम एष तु॥३॥


बीजानां जनकोऽप्युक्तो देवी सिद्धिमयी नृणाम्। अपाठे दोष उत्पन्नो द्रुतं तस्य विनाशकृत्॥४॥


एतेन प्रविधानेन देवीभक्तिमवाप्नुयात्। अत्रैव द्रुतमुद्दिष्टं धारणस्तुत्युपासकैः॥५॥


देव्याः कवचमित्येतद्दुर्गासप्तशतीसुतम्। यत्पठेत्प्रयतो नित्यं महत्सिद्धिमवाप्नुयात्॥६॥


अध्येत्ये चण्डिकां भक्त्या तेन देव्याः शरीरिणी। न विघ्नं जायते तस्य सर्वकार्येषु सर्वदा॥७॥


यो देवि प्रयतो भूत्वा पठेत् सप्तशतीमिमाम्। तस्य सर्वं भवेत्सिद्धिः स च मुक्तिमवाप्नुयात्॥८॥


देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद माता जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥९॥


आधारभूता जगतस्त्वमेका महीस्वरूपेण यतः स्थितासि। अपां स्वरूपस्थितया त्वयैतदाप्यायते कृत्स्नमलंघ्यवीर्ये॥१०॥


त्वं वैष्णवीशक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया। सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥११॥


विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥१२॥


सर्वभूता यदा देवी भुक्तिमुक्तिप्रदायिनी। त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः॥१३॥


॥ इति कीलकं स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥


पाठ विधि — कैसे करें कीलक स्तोत्र का पाठ

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और देवी के समक्ष घी का दीपक जलाएँ।
  2. दुर्गा सप्तशती के मुख्य पाठ से पहले कवच और अर्गला स्तोत्र के तुरंत बाद कीलक स्तोत्र पढ़ा जाता है।
  3. यह स्तोत्र साधना में छिपी बाधाओं को दूर करने और मंत्र-शक्ति को पूर्ण रूप से जाग्रत करने के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए इसे शांत मन और स्पष्ट उच्चारण के साथ पढ़ें।
  4. पाठ के अंत में देवी की आरती करें और क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख धार्मिक ग्रंथ पर आधारित है और श्रद्धा-परंपरा के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। यह किसी चिकित्सा या पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं है।

लेखक: Admin

श्रेणी: मंत्र, स्तोत्र और आरती

प्रकाशन तिथि: 30 जुलाई 2026

स्थिति: प्रकाशित