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संपूर्ण नवग्रह चालीसा: सभी नौ ग्रहों को प्रसन्न कर ग्रह दोषों से मुक्ति पाने का उपाय

संपूर्ण नवग्रह चालीसा: सभी नौ ग्रहों को प्रसन्न कर ग्रह दोषों से मुक्ति पाने का उपाय

संपूर्ण नवग्रह चालीसा हिंदी में पढ़ें। जानिए नवग्रह चालीसा पढ़ने की सही विधि, इसके चमत्कारी लाभ और नौ ग्रहों को प्रसन्न कर ग्रह दोषों से मुक्ति पाने का उपाय - पूरी जानकारी हिंदी में।

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संपूर्ण नवग्रह चालीसा: सभी नौ ग्रहों को प्रसन्न कर ग्रह दोषों से मुक्ति पाने का उपाय

क्या आप जानते हैं कि हमारे जीवन की हर घटना - सफलता हो या असफलता, सुख हो या दुख - इसके पीछे नौ ग्रहों की स्थिति का गहरा प्रभाव माना जाता है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु - ये नौ ग्रह मिलकर हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं। इन सभी नौ ग्रहों को एक साथ प्रसन्न करने और उनके अशुभ प्रभावों को शांत करने का सबसे सरल माध्यम है नवग्रह चालीसा

चाहे आप किसी एक ग्रह की अशुभ दशा से परेशान हों, या समग्र रूप से सभी ग्रहों की कृपा चाहते हों, नवग्रह चालीसा का नियमित पाठ आपके जीवन में संतुलन और शांति ला सकता है। आज इस लेख में हम आपको संपूर्ण नवग्रह चालीसा हिंदी में, इसे पढ़ने की सही विधि और इसके चमत्कारी लाभों के बारे में विस्तार से बताएंगे। तो अंत तक जरूर पढ़ें।

नवग्रह चालीसा क्या है?

नवग्रह चालीसा एक ऐसा विशेष भक्ति स्तोत्र है, जिसमें एक साथ सभी नौ ग्रहों - सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु - की स्तुति की जाती है। सामान्य चालीसाओं से अलग, इसमें हर ग्रह के लिए अलग-अलग चौपाइयां समर्पित हैं, जिनमें उस ग्रह के स्वरूप, उसके नाम और उसकी महिमा का वर्णन किया गया है।

ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का विशेष महत्व है, क्योंकि माना जाता है कि इन्हीं ग्रहों की स्थिति के अनुसार व्यक्ति की कुंडली और उसका भाग्य निर्धारित होता है। इसलिए जब किसी एक या अधिक ग्रह की स्थिति प्रतिकूल हो, तो नवग्रह चालीसा का पाठ अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

संपूर्ण नवग्रह चालीसा (हिंदी में)

नीचे संपूर्ण नवग्रह चालीसा दी जा रही है, जिसका आप नियमित रूप से पाठ कर सकते हैं:

॥ दोहा ॥

श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय। नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय॥

जय जय रवि शशि सोम बुध, जय गुरु भृगु शनि राज। जयति राहु अरु केतु ग्रह, करहु अनुग्रह आज॥

॥ चौपाई ॥

श्री सूर्य स्तुति

प्रथमहि रवि कहँ नावौं माथा। करहुं कृपा जनि जानि अनाथा॥

हे आदित्य दिवाकर भानू। मैं मति मन्द महा अज्ञानू॥

अब निज जन कहँ हरहु कलेषा। दिनकर द्वादश रूप दिनेशा॥

नमो भास्कर सूर्य प्रभाकर। अर्क मित्र अघ मोघ क्षमाकर॥

श्री चन्द्र स्तुति

शशि मयंक रजनीपति स्वामी। चन्द्र कलानिधि नमो नमामि॥

राकापति हिमांशु राकेशा। प्रणवत जन तन हरहुं कलेशा॥

सोम इन्दु विधु शान्ति सुधाकर। शीत रश्मि औषधि निशाकर॥

तुम्हीं शोभित सुन्दर भाल महेशा। शरण शरण जन हरहुं कलेशा॥

श्री मङ्गल स्तुति

जय जय जय मंगल सुखदाता। लोहित भौमादिक विख्याता॥

अंगारक कुज रुज ऋणहारी। करहु दया यही विनय हमारी॥

हे महिसुत छितिसुत सुखराशी। लोहितांग जय जन अघनाशी॥

अगम अमंगल अब हर लीजै। सकल मनोरथ पूरण कीजै॥

श्री बुध स्तुति

जय शशि नन्दन बुध महाराजा। करहु सकल जन कहँ शुभ काजा॥

दीजैबुद्धि बल सुमति सुजाना। कठिन कष्ट हरि करि कल्याणा॥

हे तारासुत रोहिणी नन्दन। चन्द्रसुवन दुख द्वन्द्व निकन्दन॥

पूजहु आस दास कहु स्वामी। प्रणत पाल प्रभु नमो नमामी॥

श्री बृहस्पति स्तुति

जयति जयति जय श्री गुरुदेवा। करों सदा तुम्हरी प्रभु सेवा॥

देवाचार्य तुम देव गुरु ज्ञानी। इन्द्र पुरोहित विद्यादानी॥

वाचस्पति बागीश उदारा। जीव बृहस्पति नाम तुम्हारा॥

विद्या सिन्धु अंगिरा नामा। करहु सकल विधि पूरण कामा॥

श्री शुक्र स्तुति

शुक्र देव पद तल जल जाता। दास निरन्तन ध्यान लगाता॥

हे उशना भार्गव भृगु नन्दन। दैत्य पुरोहित दुष्ट निकन्दन॥

भृगुकुल भूषण दूषण हारी। हरहु नेष्ट ग्रह करहु सुखारी॥

तुहि द्विजबर जोशी सिरताजा। नर शरीर के तुमहीं राजा॥

श्री शनि स्तुति

जय श्री शनिदेव रवि नन्दन। जय कृष्णो सौरी जगवन्दन॥

पिंगल मन्द रौद्र यम नामा। वप्र आदि कोणस्थ ललामा॥

वक्र दृष्टि पिप्पल तन साजा। क्षण महँ करत रंक क्षण राजा॥

ललत स्वर्ण पद करत निहाला। हरहु विपत्ति छाया के लाला॥

श्री राहु स्तुति

जय जय राहु गगन प्रविसइया। तुमही चन्द्र आदित्य ग्रसइया॥

रवि शशि अरि स्वर्भानु धारा। शिखी आदि बहु नाम तुम्हारा॥

सैहिंकेय तुम निशाचर राजा। अर्धकाय जग राखहु लाजा॥

यदि ग्रह समय पाय कहिं आवहु। सदा शान्ति और सुख उपजावहु॥

श्री केतु स्तुति

जय श्री केतु कठिन दुखहारी। करहु सुजन हित मंगलकारी॥

ध्वजयुत रुण्ड रूप विकराला। घोर रौद्रतन अघमन काला॥

शिखी तारिका ग्रह बलवान। महा प्रताप न तेज ठिकाना॥

वाहन मीन महा शुभकारी। दीजै शान्ति दया उर धारी॥

नवग्रह शान्ति फल

तीरथराज प्रयाग सुपासा। बसै राम के सुन्दर दासा॥ ककरा ग्रामहिं पुरे-तिवारी। दुर्वासाश्रम जन दुख हारी॥

नव-ग्रह शान्ति लिख्यो सुख हेतु। जन तन कष्ट उतारण सेतू॥ जो नित पाठ करै चित लावै। सब सुख भोगि परम पद पावै॥

॥ दोहा ॥

धन्य नवग्रह देव प्रभु, महिमा अगम अपार। चित नव मंगल मोद गृह, जगत जनन सुखद्वार॥

यह चालीसा नवोग्रह, विरचित सुन्दरदास। पढ़त प्रेम सुत बढ़त सुख, सर्वानन्द हुलास॥

॥ इति श्री नवग्रह चालीसा सम्पूर्ण ॥

नवग्रह चालीसा में वर्णित प्रत्येक ग्रह का सार

नवग्रह चालीसा की विशेषता यह है कि इसमें हर ग्रह के लिए अलग-अलग स्तुति समर्पित है:

सूर्य: दिनकर, भास्कर और प्रभाकर नामों से पूजे जाने वाले सूर्य देव को आत्मबल और तेज का कारक माना जाता है।

चंद्र: शीतलता और मन के कारक चंद्र देव को शशि, राकेश और सोम जैसे नामों से पुकारा गया है।

मंगल: साहस और भूमि के कारक मंगल देव को अंगारक और लोहितांग नामों से वर्णित किया गया है।

बुध: बुद्धि और वाणी के कारक बुध देव से बुद्धि बल और सुमति का वरदान मांगा गया है।

बृहस्पति: ज्ञान और गुरु तत्व के कारक बृहस्पति देव को देवगुरु और विद्यादानी कहा गया है।

शुक्र: सौंदर्य और वैभव के कारक शुक्र देव को भार्गव और भृगुनंदन नामों से पूजा गया है।

शनि: कर्मफल दाता शनिदेव से विपत्ति हरने की प्रार्थना की गई है।

राहु-केतु: छाया ग्रह राहु और केतु, जो चंद्र-सूर्य ग्रहण के कारक माने जाते हैं, उनसे भी शांति और सुख की कामना की गई है।

नवग्रह चालीसा पढ़ने के चमत्कारी लाभ

नियमित रूप से नवग्रह चालीसा का पाठ करने से जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं:

1. सभी ग्रह दोषों का समग्र निवारण

एक साथ सभी नौ ग्रहों की पूजा हो जाने से समग्र रूप से ग्रह दोषों में कमी आती है।

2. जीवन में संतुलन और स्थिरता

नियमित पाठ से जीवन के विभिन्न क्षेत्रों - स्वास्थ्य, धन, करियर और रिश्तों में संतुलन बना रहता है।

3. मानसिक शांति और सुख-समृद्धि

चालीसा के अंत में स्वयं उल्लेख है कि नियमित पाठ करने वाला व्यक्ति सभी सुखों का भोग करता है।

4. बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि

बुध और बृहस्पति की स्तुति से विशेष रूप से बुद्धि, विवेक और ज्ञान में वृद्धि होती है।

5. स्वास्थ्य और आयु में लाभ

सूर्य और चंद्र की कृपा से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

6. संकटों और बाधाओं से मुक्ति

मान्यता है कि नवग्रह चालीसा जीवन के कष्टों को दूर करने का सेतु है, जैसा कि स्वयं चालीसा में वर्णित है।

नवग्रह चालीसा पढ़ने की सही विधि

नवग्रह चालीसा का पूर्ण फल पाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • रविवार का दिन इसके पाठ के लिए शुभ माना जाता है, क्योंकि यह सूर्य से आरंभ होता है
  • प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • नवग्रह यंत्र या तस्वीर के समक्ष दीपक जलाएं
  • नौ अलग-अलग रंगों के पुष्प या वस्त्र अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है
  • शांत और एकाग्र मन से चालीसा का पाठ करें

सही मार्गदर्शन का महत्व

नवग्रह चालीसा पढ़ना सरल है, लेकिन यदि आपकी कुंडली में किसी विशेष ग्रह की स्थिति गंभीर रूप से प्रतिकूल है, तो सही विधि से नवग्रह शांति पूजा या हवन करवाना अत्यंत आवश्यक है। गलत विधि से की गई पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता।

यहीं पर astropujatirth.com आपकी सहायता कर सकता है। हमारे अनुभवी आचार्य आपकी कुंडली का अध्ययन कर सही ग्रह दोष की पहचान करते हैं और उसके अनुसार सही पूजा-विधि, मुहूर्त और अनुष्ठान की व्यवस्था करते हैं, ताकि आपको नवग्रहों और शिव परिवार की पूर्ण कृपा प्राप्त हो सके। चाहे आपको नवग्रह शांति पूजा करवानी हो, कुंडली दोष निवारण अनुष्ठान करवाना हो, या कोई अन्य विशेष पूजा करवानी हो - अब यह सब कुछ आसानी से एक ही स्थान पर संभव है।

निष्कर्ष

नवग्रह चालीसा सभी नौ ग्रहों को एक साथ प्रसन्न करने और जीवन में संतुलन, स्थिरता तथा सुख-समृद्धि लाने का एक अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है। चाहे आपकी कुंडली में किसी एक ग्रह की स्थिति प्रतिकूल हो या समग्र रूप से ग्रह शांति चाहते हों, यह चालीसा हर स्थिति में लाभकारी मानी जाती है। यदि आपने अभी तक इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा नहीं बनाया है, तो आज से ही शुरुआत करें और नवग्रहों की असीम कृपा को महसूस करें।

अगर आप भी नवग्रहों और शिव परिवार की विशेष कृपा पाना चाहते हैं और सही पूजा-विधि जानना चाहते हैं, तो आज ही astropujatirth.com पर विजिट करें और हमारे विशेषज्ञ आचार्यों से जुड़ें। जय नवग्रह देव!

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. नवग्रह चालीसा कब पढ़नी चाहिए? रविवार का दिन नवग्रह चालीसा पढ़ने के लिए विशेष शुभ माना जाता है, क्योंकि यह सूर्य देव की स्तुति से आरंभ होता है। इसके अलावा नियमित रूप से किसी भी दिन इसका पाठ किया जा सकता है।

2. नवग्रह चालीसा में कौन-कौन से ग्रह शामिल हैं? इसमें सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु - सभी नौ ग्रहों की अलग-अलग स्तुति की गई है, जो इसे अन्य चालीसाओं से विशिष्ट बनाता है।

3. नवग्रह चालीसा पढ़ने से क्या लाभ मिलता है? इससे सभी ग्रह दोषों का समग्र निवारण, जीवन में संतुलन, मानसिक शांति, बुद्धि-ज्ञान में वृद्धि और संकटों से मुक्ति जैसे कई लाभ मिलते हैं।

4. क्या नवग्रह चालीसा किसी विशेष ग्रह दोष के लिए भी लाभकारी है? हां, चूंकि इसमें हर ग्रह के लिए अलग-अलग चौपाई है, इसलिए किसी विशेष ग्रह की अशुभ दशा में भी उस ग्रह से जुड़ी चौपाई पर विशेष ध्यान देकर पाठ किया जा सकता है।

5. नवग्रह चालीसा पढ़ने की सही विधि क्या है? प्रातःकाल स्नान कर, नवग्रह यंत्र के समक्ष दीपक जलाकर, नौ अलग-अलग रंगों के पुष्प अर्पित कर शांत मन से पाठ करना चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer)

इस लेख में दी गई नवग्रह चालीसा और संबंधित जानकारी ज्योतिष शास्त्र, धार्मिक ग्रंथों तथा प्रचलित लोक मान्यताओं पर आधारित है। astropujatirth.com इस बात का दावा नहीं करता कि यहां वर्णित सभी फल या परिणाम वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और आध्यात्मिक जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा-पाठ को अपनाने से पहले कृपया किसी योग्य आचार्य या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। astropujatirth.com किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत हानि, नुकसान या असुविधा के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

लेखक: Admin

श्रेणी: मंत्र, स्तोत्र और आरती

प्रकाशन तिथि: 19 जुलाई 2026

स्थिति: प्रकाशित