
12 अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण: कहाँ-कब लगेगा, भारत में समय, प्रभाव और सावधानियां — पूरी जानकारी
12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण कब, कहाँ और कितने बजे लगेगा? जानें भारत में सूतक काल, राशि अनुसार प्रभाव, सावधानियां और ज्योतिषीय उपाय पूरी जानकारी के साथ।
12 अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण: कहाँ-कब लगेगा, भारत में समय, प्रभाव और सावधानियां — पूरी जानकारी
साल 2026 का यह दूसरा सूर्य ग्रहण खगोल विज्ञान की दुनिया में एक बड़ी घटना मानी जा रही है, क्योंकि 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह ग्रहण एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) है — यानी वह दुर्लभ अवस्था, जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है और दिन में भी कुछ पलों के लिए रात जैसा अंधेरा छा जाता है। श्रावण मास की अमावस्या और हरियाली अमावस्या के आसपास पड़ने वाला यह ग्रहण न केवल खगोलीय दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो हर भारतीय के मन में है — क्या यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा? क्या यहाँ सूतक काल मान्य होगा? किस राशि और नक्षत्र में यह ग्रहण घटित होगा, और इसका आपकी राशि पर क्या असर पड़ सकता है? इस लेख में हम इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से, सरल भाषा में और ज्योतिषीय दृष्टिकोण के साथ देंगे, ताकि आप 12 अगस्त 2026 के इस खगोलीय पर्व को पूरी समझ के साथ देख या समझ सकें।
12 अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण: तिथि, दिन और प्रकार
12 अगस्त 2026, दिन बुधवार को यह पूर्ण सूर्य ग्रहण घटित होगा। खगोल शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है और सूर्य के प्रकाश को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। यह घटना अमावस्या तिथि पर ही संभव होती है, जब सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि व अंश पर आ जाते हैं।
इस बार यह ग्रहण चंद्रमा के पृथ्वी के सबसे नजदीक (उपभू या पेरिजी) पहुंचने के लगभग दो दिन बाद घटित हो रहा है, जिसकी वजह से चंद्रमा का आभासी आकार सामान्य से बड़ा रहेगा। यही कारण है कि यह ग्रहण एक शानदार पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में देखा जाएगा, जिसमें पूर्णता (टोटैलिटी) की अवधि अधिकतम 2 मिनट 18 सेकंड तक रहेगी — जो हाल के वर्षों में देखे गए पूर्ण सूर्य ग्रहणों में एक उल्लेखनीय अवधि है।
खास बात यह भी है कि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य भूमि यूरोप में 1999 के बाद पहली बार दिखाई देगा, इसलिए यूरोपीय देशों में खगोलप्रेमियों में इसे लेकर खासा उत्साह है।
सूर्य ग्रहण कहाँ-कहाँ दिखाई देगा?
पूर्णता का मार्ग (Path of Totality) — यानी वह संकरी पट्टी जहाँ सूर्य पूरी तरह ढका हुआ दिखेगा — निम्नलिखित क्षेत्रों से होकर गुजरेगा:
- उत्तरी आर्कटिक क्षेत्र
- ग्रीनलैंड
- आइसलैंड (रेकजाविक सहित)
- उत्तरी अटलांटिक महासागर
- उत्तरी स्पेन (मैड्रिड, बार्सिलोना जैसे क्षेत्रों के आसपास सूर्यास्त के समय)
- पुर्तगाल का उत्तर-पूर्वी हिस्सा
- बेलिएरिक द्वीप समूह पर ग्रहण का समापन
इसके अतिरिक्त, आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse) एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र से देखा जा सकेगा, जिसमें यूरोप का अधिकांश भाग, कनाडा का बड़ा हिस्सा, उत्तरी अमेरिका के उत्तरी राज्य और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सूर्य का कुछ हिस्सा चंद्रमा से ढका हुआ दिखाई देगा, हालांकि पूर्ण अंधकार नहीं होगा।
क्या यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
यह वह सवाल है जो सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है — और इसका सीधा जवाब है: नहीं। 12 अगस्त 2026 का यह सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी हिस्से से नहीं देखा जा सकेगा — न दिल्ली से, न मुंबई से, न बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर या लखनऊ से।
इसका मुख्य कारण है समय का अंतर। जब यह ग्रहण घटित हो रहा होगा, उस समय भारत में रात हो चुकी होगी और सूर्य क्षितिज से काफी नीचे जा चुका होगा। सूर्य ग्रहण को देखने के लिए यह जरूरी है कि उस समय सूर्य आकाश में मौजूद हो, यानी वहाँ दिन का समय हो। चूंकि ग्रहण के समय भारत में सूर्य अस्त हो चुका होगा, इसलिए यहाँ आकाश में ऐसा कुछ भी नहीं होगा जिसे "ग्रहण लगना" कहा जा सके। दिल्ली में ग्रहण के अधिकतम समय पर सूर्य क्षितिज से लगभग 40 डिग्री से भी अधिक नीचे रहेगा, और दक्षिण भारत में यह अंतर और भी अधिक होगा।
इसलिए जो लोग यह जानना चाहते हैं कि "सूर्य ग्रहण 2026 भारत में कहाँ दिखेगा", उनके लिए स्पष्ट जवाब है — कहीं नहीं। हालांकि, जो लोग इस खगोलीय घटना को देखना चाहते हैं, वे नासा (NASA), यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) और अन्य खगोलीय संस्थानों द्वारा किए जाने वाले लाइव प्रसारण के माध्यम से इसे ऑनलाइन देख सकते हैं।
भारत में सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 का समय (टाइमिंग टेबल)
भले ही यह ग्रहण भारत में आँखों से न दिखे, लेकिन भारतीय समयानुसार (IST) इसकी टाइमिंग जानना ज्योतिषीय दृष्टि से और सामान्य जिज्ञासा के लिए भी महत्वपूर्ण है। अलग-अलग स्रोतों में कुछ मिनटों का अंतर मिल सकता है, लेकिन अनुमानित समय इस प्रकार है:
ग्रहण की अवस्था भारतीय समय (IST) आंशिक ग्रहण प्रारंभ रात लगभग 9:04 बजे (12 अगस्त) पूर्ण ग्रहण (टोटैलिटी) प्रारंभ रात लगभग 10:28 बजे (12 अगस्त) परम ग्रहण (अधिकतम ग्रहण) रात लगभग 11:16-11:17 बजे (12 अगस्त) पूर्ण ग्रहण समाप्त रात लगभग 12:00 बजे के बाद आंशिक ग्रहण समाप्त तड़के लगभग 1:28 बजे (13 अगस्त) इस तरह पूरी ग्रहण घटना भारतीय समय के अनुसार लगभग 4 घंटे 23 मिनट तक चलेगी, लेकिन चूंकि यह पूरा समय भारत में रात्रि का है, इसलिए यहाँ आकाश में कोई परिवर्तन दिखाई नहीं देगा। ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि यह ग्रहण वैश्विक रूप से 12 अगस्त की तारीख से जुड़ा हुआ माना जाता है, भले ही भारतीय समयानुसार इसका समापन 13 अगस्त की मध्यरात्रि के बाद हो।
क्या भारत में सूतक काल मान्य होगा?
सूतक काल को लेकर हिंदू पंचांग परंपरा में एक स्पष्ट नियम है — सूतक काल केवल उन्हीं स्थानों पर मान्य होता है, जहाँ से ग्रहण वास्तव में दिखाई देता है। चूंकि 12 अगस्त 2026 का यह सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी भाग से दृश्यमान नहीं है, इसलिए परंपरागत पंचांग नियम के अनुसार भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।
इसका सीधा अर्थ यह है कि:
- मंदिरों के कपाट सामान्य रूप से खुले रहेंगे
- भोजन बनाने या ग्रहण करने पर कोई पारंपरिक प्रतिबंध नहीं रहेगा
- गर्भवती महिलाओं के लिए सामान्यतः कोई विशेष ग्रहण-संबंधी सावधानी अनिवार्य नहीं मानी जाएगी
- पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य शुभ कार्य यथावत जारी रह सकेंगे
हालांकि, यह भी सच है कि भारत में विभिन्न परिवारों और परंपराओं में मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं। कुछ लोग शास्त्रीय दृश्यता-नियम को ही अंतिम मानते हैं, जबकि कुछ पारिवारिक या क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार सावधानी बरतना पसंद करते हैं। ऐसे में यह पूर्णतः व्यक्तिगत और पारिवारिक आस्था पर निर्भर करता है कि आप किस मत का पालन करना चाहते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि सूतक न होने का अर्थ यह नहीं कि ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव भी पूरी तरह शून्य हो जाता है — भौतिक दृश्यता और ग्रहों की ऊर्जात्मक स्थिति दो अलग विषय माने जाते हैं, जिनकी चर्चा हम आगे करेंगे।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण: किस राशि और नक्षत्र में लगेगा यह सूर्य ग्रहण?
वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को सूर्य और राहु-केतु की छाया ग्रहों के मध्य होने वाली एक विशेष खगोलीय-ज्योतिषीय घटना माना जाता है। जब सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि और अंश पर, राहु-केतु अक्ष के निकट आ जाते हैं, तब सूर्य ग्रहण घटित होता है।
लाहिड़ी अयनांश (Lahiri Ayanamsa) के अनुसार गणना करने पर, इस ग्रहण के परम काल में सूर्य-चंद्र युति कर्क राशि के अंतिम भाग में, आश्लेषा नक्षत्र में पड़ रही है। ज्योतिष में आश्लेषा नक्षत्र को एक तीव्र, रहस्यमयी और गहन परिवर्तनकारी नक्षत्र माना जाता है, जिसका स्वामी ग्रह बुध है और जिसका प्रतीक सर्प (नाग) है। कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है, जो मन, भावनाओं, माता और मानसिक स्थिरता का कारक माना जाता है।
इस दृष्टि से यह ग्रहण मानसिक स्तर पर परिवर्तन, भावनात्मक उथल-पुथल, पारिवारिक व मातृ-पक्ष से जुड़े विषयों तथा गहरे आंतरिक रूपांतरण से जुड़ा माना जा सकता है। जिन जातकों की जन्म कुंडली में चंद्रमा, कर्क राशि या आश्लेषा नक्षत्र प्रबल स्थिति में है, उन्हें इस ग्रहण काल में विशेष रूप से सजग और संतुलित रहने की सलाह दी जाती है।
सूर्य ग्रहण का भारत में ज्योतिषीय प्रभाव
यह समझना जरूरी है कि ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण का प्रभाव केवल उन्हीं क्षेत्रों तक सीमित नहीं माना जाता, जहाँ से वह भौतिक रूप से दिखाई देता है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और उनकी ऊर्जा पूरे विश्व को प्रभावित करने वाली मानी जाती है, चाहे ग्रहण किसी भी देश या महाद्वीप से दिखाई दे। इसीलिए भले ही सूतक काल भारत में मान्य न हो, फिर भी ज्योतिषीय स्तर पर इस ग्रहण के व्यापक प्रभावों को नकारा नहीं जाता।
सामान्यतः यह माना जाता है कि किसी भी ग्रहण का प्रभाव उसके घटित होने के दिन से लेकर अगले कुछ सप्ताह से लेकर छह महीने तक की अवधि में महसूस किया जा सकता है। चूंकि यह ग्रहण कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में हो रहा है, इसलिए विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक रिश्ते, भावनात्मक संतुलन, जल-संबंधी विषय और मातृ-पक्ष से जुड़े मामलों में सतर्कता बरतने की सलाह ज्योतिषी देते हैं। साथ ही, प्रशासनिक, राजनीतिक और नेतृत्व से जुड़े क्षेत्रों में भी कुछ उतार-चढ़ाव देखे जाने की संभावना जताई जाती है, क्योंकि ग्रहण जैसी घटनाएं सामूहिक चेतना और सामाजिक वातावरण पर भी असर डालती हैं।
राशि अनुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 का प्रभाव
आइए जानते हैं कि यह सूर्य ग्रहण आपकी चंद्र राशि के अनुसार आपके जीवन को किस तरह प्रभावित कर सकता है। ध्यान रहे, यह सामान्य ज्योतिषीय संकेत हैं — सटीक और व्यक्तिगत फल जानने के लिए अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाना उचित रहेगा।
मेष राशि: इस अवधि में पारिवारिक जीवन और मानसिक शांति पर ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी। छोटी-छोटी बातों पर विवाद से बचें और धैर्य बनाए रखें।
वृषभ राशि: वाणी और संचार से जुड़े मामलों में सावधानी जरूरी है। भाई-बहनों से संबंधित विषयों में सामंजस्य बनाए रखने का प्रयास करें।
मिथुन राशि: आर्थिक मामलों में सतर्कता बरतें। नए निवेश या बड़े आर्थिक निर्णय लेने से पहले सोच-विचार अवश्य करें।
कर्क राशि: चूंकि ग्रहण स्वयं आपकी राशि में लग रहा है, इसलिए यह समय आपके लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से थोड़ा संवेदनशील रह सकता है। स्वयं की देखभाल और मानसिक शांति को प्राथमिकता दें।
सिंह राशि: करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े विषयों में परिवर्तन के संकेत हैं। अधिकारियों या वरिष्ठों से संबंधों में विनम्रता बनाए रखें।
कन्या राशि: सौभाग्य और यात्रा से जुड़े मामलों में उतार-चढ़ाव संभव है। दूर यात्रा को लेकर जल्दबाजी में निर्णय न लें।
तुला राशि: गुप्त शत्रुओं और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सतर्क रहने की सलाह है। नियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य की उपेक्षा न करें।
वृश्चिक राशि: विवाह और साझेदारी से जुड़े रिश्तों में संवेदनशीलता बढ़ सकती है। संवाद बनाए रखें और गलतफहमियों से बचें।
धनु राशि: दैनिक कार्यों और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी। कार्यस्थल पर धैर्य से काम लें।
मकर राशि: संतान और रचनात्मक कार्यों से जुड़े विषयों में सजगता जरूरी है। भावनात्मक निर्णय लेने से पहले शांत मन से सोचें।
कुंभ राशि: घर-परिवार और मानसिक शांति से जुड़े मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। पारिवारिक सदस्यों के साथ समय बिताना लाभकारी रहेगा।
मीन राशि: वाणी, संचार और निकट संबंधियों से जुड़े मामलों में सतर्कता बरतें। किसी भी बहस या विवाद से दूर रहने का प्रयास करें।
सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें (सावधानियां)
भले ही यह सूर्य ग्रहण भारत में सूतक की दृष्टि से लागू न हो, फिर भी जो लोग इस ग्रहण को यूरोप, आइसलैंड, स्पेन या अन्य दृश्य क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रूप से देखने की योजना बना रहे हैं, या जो पारंपरिक आस्था के अनुसार सावधानी बरतना चाहते हैं, उनके लिए निम्नलिखित बातें ध्यान रखना उपयोगी रहेगा:
सुरक्षा से जुड़ी सावधानियां (यदि प्रत्यक्ष रूप से देख रहे हों):
- कभी भी नंगी आँखों से सूर्य की ओर सीधे न देखें, चाहे ग्रहण आंशिक ही क्यों न हो
- साधारण धूप का चश्मा (सनग्लासेस) सूर्य ग्रहण देखने के लिए सुरक्षित नहीं है
- केवल ISO 12312-2 प्रमाणित विशेष सूर्य ग्रहण चश्मे या सोलर फिल्टर का ही उपयोग करें
- पिनहोल प्रोजेक्टर जैसे सुरक्षित तरीकों से भी ग्रहण को परोक्ष रूप से देखा जा सकता है
- केवल पूर्णता (टोटैलिटी) के उन कुछ पलों में, जब सूर्य पूरी तरह ढका हो, बिना फिल्टर के देखा जा सकता है — लेकिन जैसे ही सूर्य फिर से दिखना शुरू हो, तुरंत आँखों की सुरक्षा वापस लगा लें
पारंपरिक व आध्यात्मिक सावधानियां (जो लोग मानना चाहें):
- ग्रहण के दौरान मंत्र जप, ध्यान और ईश्वर स्मरण को शुभ माना जाता है
- गर्भवती महिलाएं यदि पारिवारिक परंपरा में विश्वास रखती हैं तो सामान्य विश्राम और शांत वातावरण में रहना पसंद कर सकती हैं
- नए और शुभ कार्य आरंभ करने से बचने की परंपरा कुछ परिवारों में मानी जाती है, हालांकि भारत में सूतक लागू न होने के कारण यह पूर्णतः वैकल्पिक है
- ग्रहण के पश्चात स्नान करना और स्वच्छता अपनाना शुभ माना जाता है
चूंकि यह ग्रहण भारत में रात्रि के समय, सूर्यास्त के काफी बाद घटित होगा, इसलिए भारत में रहने वाले अधिकांश लोगों के लिए सामान्य दिनचर्या में कोई परिवर्तन आवश्यक नहीं है।
सूर्य ग्रहण 2026 के ज्योतिषीय उपाय
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण काल को ऊर्जात्मक दृष्टि से एक संवेदनशील समय माना जाता है, जब ग्रहों की ऊर्जा में परिवर्तन होता है। इस दौरान निम्नलिखित उपाय करना शुभ और लाभकारी माना जाता है:
- सूर्य मंत्र का जप: "ॐ आदित्याय विद्महे सहस्र किरणाय धीमहि तन्नो सूर्य प्रचोदयात्" मंत्र का जप मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाभकारी माना जाता है।
- आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ: सूर्य देव की कृपा प्राप्ति और आत्मबल बढ़ाने के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ अत्यंत प्रभावी माना गया है।
- महामृत्युंजय मंत्र जप: मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप विशेष लाभकारी माना जाता है, विशेषकर उन जातकों के लिए जिनकी कुंडली में चंद्रमा या सूर्य कमजोर स्थिति में हैं।
- दान-पुण्य: ग्रहण से जुड़ी परंपरा में गेहूं, गुड़, तांबा, लाल वस्त्र या अन्न का दान करना शुभ माना जाता है, विशेषकर उन जातकों के लिए जिनकी कुंडली में सूर्य या चंद्रमा से जुड़े दोष हों।
- कुंडली विश्लेषण करवाना: चूंकि यह ग्रहण कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लग रहा है, इसलिए जिन जातकों की जन्म कुंडली में यह राशि या नक्षत्र संवेदनशील स्थिति में है, उनके लिए विशेषज्ञ ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण करवाना और आवश्यकतानुसार शांति पूजा या ऑनलाइन अनुष्ठान करवाना लाभकारी रह सकता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: सूर्य ग्रहण क्यों और कैसे होता है?
खगोल विज्ञान की दृष्टि से सूर्य ग्रहण एक पूर्णतः प्राकृतिक और गणनीय घटना है। जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है, और तीनों — सूर्य, चंद्रमा व पृथ्वी — एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, तब चंद्रमा की छाया पृथ्वी की सतह पर पड़ती है। जिस क्षेत्र पर चंद्रमा की गहरी छाया (उम्ब्रा) पड़ती है, वहाँ पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देता है, जबकि उसके आसपास के बड़े क्षेत्र में हल्की छाया (पेनम्ब्रा) पड़ने से आंशिक ग्रहण दिखाई देता है।
इस बार का ग्रहण इसलिए भी खास है क्योंकि यह चंद्रमा के उपभू (पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु) से गुजरने के कुछ ही समय बाद हो रहा है, जिससे चंद्रमा का आभासी आकार सूर्य से थोड़ा बड़ा दिखाई देगा और पूर्णता की अवधि लंबी होगी। यह ग्रहण सरोस श्रृंखला (Saros Series) संख्या 126 का हिस्सा है, जो खगोलविदों के लिए ग्रहणों के पैटर्न को समझने में सहायक होती है।
विज्ञान और आध्यात्म — दोनों दृष्टिकोण अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। जहाँ विज्ञान इसे खगोलीय घटनाओं के गणितीय क्रम के रूप में देखता है, वहीं ज्योतिष इसे ग्रहों की ऊर्जा और मानव जीवन पर उनके सूक्ष्म प्रभाव के रूप में समझने का प्रयास करता है।
निष्कर्ष
12 अगस्त 2026 का यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भले ही भारत से दिखाई न दे और यहाँ सूतक काल भी मान्य न हो, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर, और भारत के जातकों पर भी, महसूस किया जा सकता है। कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लगने वाला यह ग्रहण मानसिक, भावनात्मक और पारिवारिक स्तर पर सजगता बरतने का संकेत देता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा? नहीं, यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी हिस्से से दिखाई नहीं देगा, क्योंकि उस समय भारत में रात्रि होगी और सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा। इसे केवल यूरोप, आइसलैंड और स्पेन जैसे क्षेत्रों से देखा जा सकेगा।
प्रश्न 2: क्या भारत में इस ग्रहण के दौरान सूतक काल मान्य होगा? नहीं, पारंपरिक पंचांग नियम के अनुसार सूतक काल केवल दृश्य ग्रहण पर ही लागू होता है। चूंकि यह ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा और मंदिर सामान्य रूप से खुले रहेंगे।
प्रश्न 3: यह सूर्य ग्रहण किस राशि और नक्षत्र में लगेगा? लाहिड़ी अयनांश के अनुसार यह ग्रहण कर्क राशि के अंतिम भाग और आश्लेषा नक्षत्र में घटित होगा, जिसका स्वामी ग्रह क्रमशः चंद्रमा और बुध माना जाता है।
प्रश्न 4: भारतीय समयानुसार यह ग्रहण कब शुरू और कब समाप्त होगा? भारतीय समयानुसार यह ग्रहण 12 अगस्त की रात लगभग 9:04 बजे शुरू होकर, परम ग्रहण रात लगभग 11:16 बजे होते हुए, 13 अगस्त की रात लगभग 1:28 बजे समाप्त होगा।
प्रश्न 5: क्या इस ग्रहण का भारत के जातकों पर कोई ज्योतिषीय प्रभाव पड़ेगा? हाँ, भले ही यह भौतिक रूप से न दिखे, ज्योतिष के अनुसार ग्रहण की ऊर्जा वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालती है, विशेषकर कर्क राशि, चंद्रमा और आश्लेषा नक्षत्र से जुड़े जातकों को अगले कुछ सप्ताह सजग रहने की सलाह दी जाती है।
अस्वीकरण: यह लेख ज्योतिषीय एवं पारंपरिक मान्यताओं तथा उपलब्ध खगोलीय जानकारी पर आधारित है। यह किसी वैज्ञानिक, चिकित्सीय या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है। कृपया व्यक्तिगत मार्गदर्शन हेतु विशेषज्ञ से परामर्श करें।
लेखक: Admin
श्रेणी: ग्रह गोचर
प्रकाशन तिथि: 7 अगस्त 2026
स्थिति: प्रकाशित
